21 अर्थियां... काली सुबह, दर्दनाक किस्सा, खौफ में लोग; UP में डर और दर्द बनकर दर्ज हुआ ये दिन, कई बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

punjabkesari.in Friday, Jan 09, 2026 - 05:42 PM (IST)

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में 21 मई 1993 का दिन आज भी लोगों के दिलों में डर और दर्द बनकर दर्ज है। इसी दिन आगरा के खटीकपाड़ा इलाके में दूषित पानी पीने से 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। यह हादसा पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख देने वाला था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि करीब 33 साल बीतने के बावजूद पीड़ित परिवारों को आज तक इंसाफ नहीं मिल सका।

सरकारी पानी से उठ गया भरोसा
खटीकपाड़ा के निवासी बताते हैं कि हादसे के बाद से उन्हें नगर निगम के पानी पर भरोसा ही नहीं रहा। पानी की सप्लाई आज भी आती है, लेकिन डर के कारण लोग उसे पीने से बचते हैं। मजबूरी में अधिकांश परिवारों ने अपने घरों में समरसेबल लगवा लिया है और उसी पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि 1993 की त्रासदी के बाद से नल का पानी देख कर ही खौफ पैदा हो जाता है।

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मुआवजा सिर्फ ऐलान तक सीमित
हादसे के बाद सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई थी, लेकिन वह सिर्फ कागजी आश्वासन बनकर रह गई। आज भी कई परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कई बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया और माताओं ने कठिन परिस्थितियों में मजदूरी कर बच्चों का पालन-पोषण किया। साल 2026 आ गया, लेकिन सरकारी मदद की उम्मीद अब भी अधूरी है।

आज भी इंसाफ की आस
खटीकपाड़ा के लोग आज भी सरकार से न्याय, मुआवजा और सुरक्षित पेयजल व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का ऐसा दाग है, जो दशकों बाद भी नहीं मिट पाया है।


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Content Editor

Purnima Singh

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