सिस्टम की शर्मनाक तस्वीर...6 साल की रेप पीड़िता को 15 घंटे तक नहीं मिला इलाज, दर्द में तड़पती रही मासूम

punjabkesari.in Saturday, Mar 28, 2026 - 02:52 PM (IST)

गाजीपुर: यूपी के गाजीपुर जिले से एक शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। नवरात्रि की अष्टमी के पावन पर्व पर यहां कन्या पूजन किया जाता है, वहीं एक दरिंदे ने एक मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी। मासूम के साथ हुई हैवानियत के बाद उसके माता-पिता उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उसे इलाज नहीं मिला। करीब 15 घंटे तक मासूम दर्द से तड़पती रही। जिले का स्वास्थ्य महकमा इलाज और मेडिको-लीगल (MLC) के नाम पर उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल पेंडुलम की तरह दौड़ाता रहा। 

अब जानिए पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, एक 6 साल की मासूम दरिंदगी का शिकार हो गई। उसके परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि मासूम का इलाज करने की बजाय डॉक्टर और प्रशासन रोस्टर और नियमों की दुहाई देते रहे। बच्ची दर्द में तड़प रही थी, लेकिन किसी भी डॉक्टर ने उसका इलाज नहीं किया। करीब 8 से 9 घंटे तक जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो परिजनों ने अस्पताल परिसर में ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। 

गायब थे ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर
मामले की जानकारी होने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सुनील पांडे मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि वो इस लापरवाही के खिलाफ शासन को पत्र लिखेंगे। जवाब में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आनंद मिश्रा ने बयान दिया, जिसने मामले में नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने कहा कि मेडिको-लीगल के लिए ट्रामा सेंटर में दो राजपत्रित डॉक्टरों (डॉ. पल्लई राय और डॉ. मनोरम यादव) की रोस्टर के अनुसार ड्यूटी लगाई गई थी। लेकिन घटना के समय दोनों ही डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। 

15 घंटे बाद हुआ इलाज! 
प्रिंसिपल के अनुसार, मासूम को पहले स्टेबल किया गया था, लेकिन डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण मेडिकल घटना के लगभग 15 घंटे बाद (दोपहर 3 बजे) हो सका। उन्होंने कहा कि मेडिको-लीगल करने वाले राजपत्रित अधिकारी सीधे CMO के नियंत्रण में आते हैं, ऐसे में उनकी अनुपस्थिति का जवाबदेही भी उन्हीं की है। यह मामला सामने आने के बाद सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है। इस घटना ने मानवता और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। फिलहाल, ये मामला शासन तक पहुंच गया है। मासूम के परिजनों की मांग है कि अपराधी को कड़ी सजा मिले और लापरवाही करने वाले डॉक्टरों पर भी कार्रवाई की जाए। 


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Content Editor

Pooja Gill

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