Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर में चढ़ाई खिचड़ी, कहा- ‘ये मेरा सौभाग्य है...'
punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 10:03 AM (IST)
गोरखपुर: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गुरुवार तड़के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे नाथपंथ की परंपरा के अनुसार महायोगी गुरु गोरखनाथ को श्रद्धा की पवित्र खिचड़ी अर्पित की। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और लोकमंगल की कामना की। खिचड़ी अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों, संतों और श्रद्धालुओं को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
‘बाबा को खिचड़ी चढ़ाना मेरा सौभाग्य’
सीएम योगी ने कहा कि मकर संक्रांति के अवसर पर गोरखपुर में लाखों श्रद्धालु गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर पंक्तिबद्ध होकर खिचड़ी चढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान गोरखनाथ के चरणों में खिचड़ी अर्पित करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
सूर्यदेव जगत की आत्मा हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है। सूर्यदेव को जगत की आत्मा माना गया है और यह पर्व सूर्य उपासना का प्रतीक है। मकर संक्रांति के बाद सनातन परंपरा में सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। उन्होंने बताया कि ज्योतिष के अनुसार सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, जिसे संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। सीएम योगी ने कहा कि मकर संक्रांति के साथ सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और अगले छह महीने तक यह काल चलता है।
खिचड़ी चढ़ाने के लिए लगी श्रद्धालुओं की कतार
मकर संक्रांति के मुख्य पर्व से एक दिन पहले बुधवार को गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने के लिये तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गयी। गोरखनाथ मंदिर के सूत्रों ने बताया कि मकर संक्रांति का मुख्य पर्व बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। लाखों श्रद्धालुओं ने बुधवार को ही बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाई। बुधवार तड़के मंदिर के कपाट खुलते ही खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, पड़ोसी राज्य बिहार और नेपाल से आए श्रद्धालुओं ने कतार में खड़े होकर गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाई।

