कुएं से तीन दिन तक निकलती रहीं लाशें! संभल 1978 के दंगे का दर्दनाक सच—पीड़ित ने सुनाई चौंकाने वाली कहानी
punjabkesari.in Sunday, Nov 30, 2025 - 07:45 AM (IST)
Sambhal News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक दर्दनाक और चौंकाने वाली कहानी सामने आई है। 1978 के संभल दंगे के पीड़ित चंदर नागपाल ने बताया कि उस समय उनके परिवार और गांव के कई लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि कुएं में बुजुर्गों की अस्थियां मिली हैं, जिन्हें उन्होंने गंगा में प्रवाहित करने का संकल्प लिया है।
1978 के दंगे की दर्दनाक यादें
चंदर नागपाल ने याद किया, “संभल का जितना दर्द बयान किया जाए, वह कम है। उस समय हमारे परिवार का कारोबार और जीवन दोनों प्रभावित हुए। हमारे गांव छंगामल कोठी में शीरे के कुओं में कई लोगों की लाशें फेंकी गई थीं। चालीस हिंदुओं की लाशें हमारे सामने निकली थीं। तीन दिन तक लाशें निकलती रहीं। उन्हें देखकर रूह कांप गई थी। उस समय हमारे पास 115 बीघा जमीन, मकान और दुकान थी, जो सब खो गया। बचने के लिए हमें मुरादाबाद जाना पड़ा, जहां रोज़ी-रोटी के लिए काम किया।” उन्होंने आगे कहा कि आज जो कुएं मिले हैं, वहां से उनके बुजुर्गों की अस्थियां निकाली जाएंगी और उन्हें गंगा में प्रवाहित किया जाएगा। उनका मानना है कि दंगे में मारे गए बुजुर्गों की आत्मा तड़प रही होगी।
संभल में खुदाई जारी
बताया गया है कि संभल में लगातार खुदाई की जा रही है। कई स्थानों पर खुदाई में पूरे मंदिर के अवशेष भी मिले हैं। एएसआई (अर्धसैनिक सर्वेक्षण संस्था) ने खुदाई के लिए डेरा डाल रखा है। सुरक्षा के लिए कोतवाली और पुलिस चौकियों की संख्या भी बढ़ा दी गई है। चंदर नागपाल ने कहा कि 1978 में गांव में हिंदुओं की संख्या ज्यादा थी और अब वह उम्मीद करते हैं कि योगी सरकार के तहत संभल दंगों की जांच और प्रशासनिक कार्य सही तरीके से होंगे।

