पलक, रिंकी, सीमा और एक गहरा राज: नाबालिग को शादीशुदा दिखाकर निकलवाए अंडाणु, प्रयागराज IVF केस में रूह कंपा देने वाला खुलासा

punjabkesari.in Sunday, Feb 08, 2026 - 03:17 PM (IST)

Prayagraj News: प्रयागराज के फाफामऊ इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मेडिकल सिस्टम और एजेंट नेटवर्क पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक 15 साल की नाबालिग लड़की को पैसों और महंगे मोबाइल का लालच देकर एक IVF सेंटर तक ले जाया गया, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसके अंडाणु (egg) निकालने की प्रक्रिया कराई गई।

मां की शिकायत से खुला मामला
घटना का खुलासा तब हुआ जब लड़की की मां ने फाफामऊ थाने में शिकायत दर्ज कराई। मां का कहना है कि पड़ोस में रहने वाली पलक और उसकी मां रिंकी लड़की को अपने साथ ले गई थीं। पहले उसे काम दिलाने का झांसा दिया गया, फिर पैसों का लालच दिया गया। इसके बाद लड़की घर से ज्यादा बाहर रहने लगी और एक दिन अचानक गायब हो गई। तलाश करने पर पता चला कि वह किसी IVF सेंटर के संपर्क में थी। 3 फरवरी को लड़की को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया, जहां चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के सामने उसका बयान दर्ज हुआ।

नाबालिग का बयान
लड़की ने बताया कि उसे समझाया गया था कि यह “नॉर्मल मेडिकल डोनेशन” है और इससे पैसे मिलेंगे। उसे प्रक्रिया की कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी गंभीरता के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई।

फर्जी पहचान का खेल
जांच में सामने आया कि लड़की नाबालिग थी, इसलिए सीधे IVF प्रक्रिया संभव नहीं थी। पुलिस के मुताबिक:
- सीमा नाम की महिला के पास लड़की को ले जाया गया
- सीमा के बेटे हिमांशु ने फर्जी आधार कार्ड बनवाया
- दस्तावेज में लड़की की उम्र बालिग दिखाई गई
- उसे शादीशुदा भी दर्शाया गया
- फिर उसे IVF सेंटर की एजेंट कल्पना के पास ले जाया गया
- वहां फर्जी कंसेंट एफिडेविट तैयार हुआ
- 20 जनवरी को मेडिकल प्रक्रिया कराई गई

पुलिस जांच क्या कहती है
DCP गंगानगर जोन कुलदीप सिंह गुनावत के अनुसार: मां की तहरीर पर केस दर्ज हुआ। कई आरोपियों को हिरासत में लिया गया। दस्तावेज, मोबाइल और सेंटर रिकॉर्ड की जांच हो रही है। फर्जी पहचान बनाकर अवैध प्रक्रिया कराने के आरोप में कार्रवाई जारी है।

IVF प्रक्रिया क्या है?
विशेषज्ञ बताते हैं कि Egg Donation एक नियंत्रित मेडिकल प्रक्रिया है, जो केवल बालिग महिलाओं में मेडिकल जांच के बाद ही कानूनी रूप से की जाती है। नाबालिग से अंडाणु लेना कानूनन अपराध है।

क्या एजेंट नेटवर्क सक्रिय था?
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या IVF डोनर के नाम पर कोई अनौपचारिक एजेंट नेटवर्क काम कर रहा था। क्योंकि:
- फर्जी दस्तावेज बने
- कंसेंट पेपर तैयार हुआ
- मेडिकल प्रक्रिया पूरी हुई
- यह सब किसी संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

लड़की की हालत
पुलिस के अनुसार:
- नाबालिग की काउंसलिंग चल रही है
- मेडिकल जांच कराई जा रही है
- मनोवैज्ञानिक सहायता दी जा रही है
- CWC पूरे मामले की निगरानी कर रही है

बड़े सवाल
यह मामला कई अहम सवाल खड़े करता है:
- क्या नाबालिगों को पैसों के लालच में मेडिकल डोनेशन के लिए फंसाया जा रहा है?
- फर्जी दस्तावेज बनाना इतना आसान कैसे हुआ?
- IVF जैसे संवेदनशील क्षेत्र में एजेंट मॉडल का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा?
- विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी मेडिकल डोनेशन या पैसों के ऑफर से पहले कानूनी जानकारी जरूर लें।


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Content Editor

Anil Kapoor

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