बसपा में वापसी करेंगे नसीमुद्दीन सिद्दीकी! या फिर राजनीति से लेंगे संन्यास, पढ़ें स्पेशल स्टोरी
punjabkesari.in Sunday, Jan 25, 2026 - 01:53 PM (IST)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सियासी जमीन मजबूत करने में जुटी कांग्रेस को शनिवार को बड़ा झटका लगा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश में राजनीति गर्म हो गई है। अब सवाल यह है कि क्या नसीमुद्दीन सिद्दीकी राजनीति से संन्यास लेंगे या फिर अपनी पूरानी पार्टी (बसपा) में वापसी करेंगे। इसे लेकर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी बुंदेलखंड के क्षेत्र में मुस्लिम चेहरा के रूप में काफी अच्छी पकड़ रखते हैं। ऐसे में अगर बसपा में वह लोटते हैं तो पार्टी को फायदा हो सकता है।
समाजवादी पार्टी में जाने की आशंका
हालांकि उन्होंने इस बात को लेकर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। ऐसे में लोगों को मानना है कि वह समाजवादी पार्टी की भी सदस्यता ले सकते हैं। क्यों कि उन्होंने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अखिलेश यादव की तारीफ करते हुए नजर आ रहे थे। इससे उम्मीद लगाई जा रही है कि वह एक समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। हालांकि नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि वह जल्द ही अपने समर्थकों के साथ मिलकर अगला कदम उठाएंगे।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मनाने में जुटी कांग्रेस
आप को बता दें कि उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसे लेकर उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा को भेजा है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेता सिद्दीकी से संपर्क साधने और उन्हें मनाने की कोशिश की जाएगी। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने इस्तीफे के पत्र में किसी स्पष्ट वजह का उल्लेख नहीं किया है। लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे लंबे समय से शीर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहे थे और खुद को पार्टी में साइडलाइन महसूस कर रहे थे।
बसपा सरकार में मंत्री रह रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी
बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने कई समर्थकों के साथ कांग्रेस से इस्तीफा दिया है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में अपने सभी साथियों के साथ इसलिए शामिल हुए थे कि जातिवाद और संप्रदायवाद के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सके लेकिन कांग्रेस में रह कर वह यह लड़ाई नहीं लड़ पा रहे हैं। मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार में मंत्री रह चुके नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि कांग्रेस के किसी भी पदाधिकारी से कोई शिकायत नहीं है लेकिन जिस काम के लिए वह पाटर्ी में आए थे वह नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके साथ इस्तीफा देने वाले सभी लोगों से मशविरा किया जा रहा है। जिस तरफ सहमति बनेगी उसी दल के साथ मिलकर आगे जनता की लड़ाई लड़ी जाएगी।
कैबिनेट मंत्री भी रहे नसीमुद्दीन
जब मायावती 1995 में पहली बार सीएम बनीं, तब नसीमुद्दीन को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इसके बाद 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक मायावती की शॉर्ट टर्म गवर्नमेंट में भी वे मंत्री बने। 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक एक साल के लिए वे कैबिनेट का भी हिस्सा रहे। इसके बाद 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक मायावती की फुल टाइम गवर्नमेंट में भी मंत्री रहे। मायावती का करीबी होने के कारण लोग उन्हें मिनी मुख्यमंत्री कहा करते थे।
बेटे के लिए किया परिवार से झगड़ा
नसीमुद्दीन के छोटे भाई हसनुद्दीन रेलवे में टीटीई के पद पर नौकरी करते थे। 2010 में बसपा सरकार आने के बाद उन्हें वीआरएस ले लिया और नसीमुद्दीन के विभागों में ठेकेदारी शुरू कर दी। उन्होंने अपने भाई निजामुद्दीन से बांदा विधानसभा चुनाव के लिए बसपा से टिकट मांगा। इस पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सियासी विरासत अपने बेटे अफजल को देने की बात कहकर किसी फैमिली मेंबर को राजनीति में लाने से साफ इनकार कर दिया। जिससे सिद्दीकी परिवार में झगड़ा बढ़ गया।
पत्नी रही एमएलसी
2010 के एमएलसी चुनाव में मायावती ने बांदा हमीरपुर क्षेत्र से नसीमुद्दीन के बड़े भाई और पुराने बसपा नेता जमीरउद्दीन सिद्दीकी को प्रत्याशी घोषित कर दिया। बताते हैं कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी को ये बात बेहद नागवार गुजरी और एक दिन बाद ही जमीरउद्दीन का टिकट कटवाकर नसीमुद्दीन ने अपनी पत्नी हुस्ना सिद्दीकी को एमएलसी प्रत्याशी घोषित करा दिया। चुनाव जितवाकर अपनी पत्नी को विधान परिषद पहुंचा दिया। बस इसके बाद ही परिवार में विद्रोह हुआ और हसनुद्दीन सिद्दीकी और नसीमुद्दीन के साढ़ू पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शकील अली ने सपा का दामन थामकर नसीमुद्दीन की सियासी जमीन में भूचाल ला दिया।

