पूंजीघरानों की हितरक्षक है BJP सरकार, किसान-मजदूर उसकी प्राथमिकता में नहीं आते: पटेल

9/22/2020 12:03:40 PM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष (Chairman) नरेश उत्तम पटेल (Naresh Uttam Patel) ने कहा कि भाजपा (BJP) किसानों को मजदूर बनाने वाले कृषि अध्यादेश के बाद अब श्रमिक विरोधी औद्योगिक सम्बंध संहिता-2020 विधेयक ले आई है जिससे साफ हो गया है कि वह पूरी तरह पूंजीघरानों की हितरक्षक है और किसान, नौजवान, मजदूर उसकी प्राथमिकता में नहीं आते हैं। 

अब कंपनी सरकार से बिना मंजूरी के कर्मचारियों की जब चाहे कर सकेगी छंटनी 
पटेल ने सोमवार को कहा कि भाजपा किसानों को मजदूर बनाने वाले कृषि अध्यादेश के बाद अब श्रमिक विरोधी औद्योगिक सम्बंध संहिता-2020 विधेयक ले आई है। नौजवानों पर तो आए दिन उसकी लाठियां बरस ही रही है। भाजपा सरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव के नाम पर केवल पूंजीपतियों की मनमानी करने की छूट दी हैं। अब तक 100 से कम कर्मचारी वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान या संस्थान ही पूर्व सरकारी मंजूरी के बिना कर्मचारियों को रख और उन्हें हटा सकते थे। अब नई व्यवस्था में 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कम्पनी सरकार से मंजूरी लिए बिना कर्मचारियों की जब चाहे छंटनी कर सकेंगे।

नए प्राविधान से बड़े फैक्ट्री मालिकों के हाथ में छंटनी का आया हथियार
उन्होंने कहा कि नए प्राविधान से अब बड़े फैक्ट्री मालिकों के हाथ में छंटनी का ऐसा हथियार आ गया है जिसका दुरूपयोग करके और दबाव डालकर एक तो कर्मचारी यूनियन ही बनने नहीं देंगे, दूसरे अपने कर्मचारियों को छंटनी का जब तब भय दिखाकर उन्हें बंधुआ मजदूर बनाकर रखने को स्वतंत्रत होंगे। भाजपा कर्मचारियों के हितों की हत्या कर मालिकों को मलाई बांटने का काम कर रही है।

अब भाजपा श्रमिक वर्ग का मनोबल तोड़ने में जुटी
पटेल ने कहा कि सपा श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए जोरदार आवाज उठाएगी। बेकारी सुरसा की तरह बढ़ती जा रही है। पहले ही कोरोना संकट और लॉकडाउन से बड़ी संख्या में श्रमिकों को तमाम आर्थिक परेशानियां उठानी पड़ रही है। आज भी वे उससे उबर नहीं पाए हैं। अब भाजपा श्रमिक वर्ग का मनोबल तोड़ने, उन्हें असहाय बनाने की साजिश में जुट गई है। इससे साबित हो गया है कि श्रमिकों को रोजगार देने के उसके दावे सिर्फ सफेद झूठ है। ऐसी झूठी और प्रपंच रचने वाली सरकार को जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।


Umakant yadav

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