वकील मुकदमे में रुचि नहीं ले रहे तो क्यों न नियुक्त किए जाएं न्यायमित्र: हाईकोर्ट

Wednesday, January 10, 2018 10:13 AM

इलाहाबाद: आपराधिक मुकदमे की सुनवाई में रुचि नहीं ले रहे वकीलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि वकीलों को मुकदमे में रुचि नहीं है तो क्यों न अदालत वादकारी की राय लेकर उनके स्थान पर न्यायमित्र नियुक्त कर दें।

अधिवक्ताओं को कारण बताओं नोटिस जारी
बता दें कि कोर्ट ने दोनों अधिवक्ताओं को कारण बताओं नोटिस जारी किया है। नोटिस में हाइकोर्ट ने पूछा कि क्यों न जेल में बंद वादकारी की राय लेकर इस केस में न्यायमित्र नियुक्त किया जाएं, ताकि वह अपील के निस्तारण में अदालत का सहयोग कर सके।

पेपर बुक तैयार नहीं होने पर जमानत निरस्त 
इससे पूर्व हाईकोर्ट ने अपीलार्थी की पहली जमानत अर्जी खारिज करते हुए अपील पर अंतिम सुनवाई के लिए पेपर बुक तैयार करने का आदेश दिया था। जिसके बाद दूसरी जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। वादी के अधिवक्ता ने बहस की कि अंतिम सुनवाई नहीं हुई है इसलिए याची जमानत पाने का हकदार है।

दोनों वकीलों को नोटिस जारी
पेपर बुक तैयार नहीं होने के कारण इस बार भी जमानत निरस्त हो गई। जिसके बाद केस कई बार अंतिम सुनवाई के लिए लगा, लेकिन अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता बहस के लिए उपस्थित नहीं हुआ। इसे देखते हुए न्यायमूर्ति ए.पी.शाही और न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की खंडपीठ ने इस मुकदमे के दोनों वकीलों को नोटिस जारी किया।
 



अपना सही जीवनसंगी चुनिए | केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन