''पुलवामा आतंकियों के पास मिला तुम्हारा सिम''... 24 घंटे ऑन रखा Video Call, यूपी में बुजुर्ग दंपत्ति से ऐंठे लाखों

punjabkesari.in Tuesday, Aug 18, 2026 - 09:29 AM (IST)

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लालबाग इलाके से डिजिटल अरेस्ट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने 70 वर्षीय रिटायर्ड एफसीआई (FCI) कर्मचारी और उनकी पत्नी को पुलवामा आतंकी हमले और मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर करीब 42.09 लाख रुपए की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को एटीएस, एनआईए और सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताकर बुजुर्ग दंपत्ति को लगातार 18 दिनों तक व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान ठगों ने दंपत्ति के बैंक खातों, एफडी, पोस्ट ऑफिस सेविंग्स और पत्नी के गहनों तक का पूरा हिसाब वसूल लिया।

पीड़ित अंसार जमाल अब्बासी के मुताबिक, 23 जुलाई की दोपहर करीब 1:32 बजे उनके व्हाट्सऐप पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने दावा किया कि पुलवामा हमले के सिलसिले में गिरफ्तार हुए आतंकियों ने मनीष गोयल नाम के व्यक्ति का खुलासा किया है, जिसके पास पीड़ित के नाम पर जारी सिम कार्ड, आईसीआईसीआई बैंक का एटीएम और बैंक स्टेटमेंट मिला है। ठगों ने बुजुर्ग और दिव्यांग होने की आड़ लेते हुए कहा कि उन्हें थाने ले जाने के बजाय घर पर ही हाउस अरेस्ट किया जा रहा है।

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इसके बाद दंपत्ति को सख्त हिदायत दी गई कि वे फोन का वीडियो कॉल 24 घंटे चालू रखेंगे। धमकी दी गई कि यदि किसी रिश्तेदार या परिचित से बात की, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर 7 साल के लिए जेल भेज दिया जाएगा। डर के माहौल में रात करीब 10 बजे तक ठगों ने पीड़ित दंपत्ति से उनकी कुल जमा पूंजी, एफडी और जेवरों की जानकारी हासिल कर ली। इसके तुरंत बाद एक अन्य कॉल आई, जिसमें आरोपी ने खुद को पुणे एटीएस का अधिकारी बताया।

24 जुलाई को शातिर ठगों ने सीबीआई अधिकारी और हाईकोर्ट के जज से बात कराने का नाटक रचा। वीडियो कॉल के दौरान दंपत्ति को भरोसा दिलाया गया कि यह प्रक्रिया केस से नाम हटाने और जमानत के लिए जरूरी है। इसके बाद जांच और वेरीफिकेशन के नाम पर आरोपियों द्वारा दिए गए अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए पैसे जमा कराने का सिलसिला शुरू हुआ। करीब 18 दिनों तक चले इस खेल में दंपत्ति ने 6 किस्तों में कुल 42,09,869 रुपए ठगों के बताए खातों में भेज दिए।

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बताया जा रहा है कि जब काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला, तब पीड़ित को ठगी का शिकार होने का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में तहरीर दी। मामले पर जानकारी देते हुए साइबर क्राइम इंस्पेक्टर आलोक राव ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उन सभी बैंक खातों की डिटेल और ट्रांजैक्शन चेन को खंगाल रही है, जिनमें रकम ट्रांसफर की गई है। जल्द ही ठगों के नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।


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Content Editor

Anil Kapoor

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