जानिए, कौन है कानपुर में DSP, SHO, 2 दारोगा एवं 4 सिपाहियों की हत्या करने वाला खूंखार विकास दुबे?

7/4/2020 11:11:50 AM

लखनऊः यूपी के कानपुर में हुए एनकाउंटर ने पूरे पुलिस प्रशासन में अफरा-तफरी मचाई हुई है। एनकाउंटर में रातों रात पुलिस के 8 जवान शहीद हो जाना किसी पहाड़ टूटने से कम नहीं है। वहीं अब सबके जहन में एक ही सवाल गोते खा रहा होगा कि आखिर इस घटना को अंजाम देने वाला शातिर कौन है। तो आपको बता दें कि 60 मुकदमों में अपना नाम शुमार करने वाला विकास दुबे इस पूरी घटना का मास्टरमाइंड है।
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बीजेपी राज्यमंत्री का भी हत्यारा है विकास दूबे 
वर्ष 2000 में कानपुर के शिवली थानाक्षेत्र स्थित ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या में भी विकास का नाम आया था। इसके अलावा कानपुर के शिवली थानाक्षेत्र में ही वर्ष 2000 में रामबाबू यादव की हत्या के मामले में विकास की जेल के भीतर रहकर साजिश रचने का आरोप है। वर्ष 2004 में केबिल व्यवसायी दिनेश दुबे की हत्या के मामले में भी विकास आरोपित है। उसके खिलाफ 50 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इतना ही नहीं 11 नवंबर 2001 को विकास दुबे ने कानपुर के थाना शिवली के बाहर भाजपा नेता संतोष शुक्ला (तत्कालीन राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

कभी मायावती की पार्टी BSP में ज़िला पंचायत का सदस्य रहा खूंखार विकास
जिस विकास दूबे ने गुरुवार रात 8 पुलिसवालों की जान ली, वो कभी मायावती की पार्टी BSP में ज़िला पंचायत का सदस्य रहा। आख्रिरी बार 2017 में यूपी की STF ने उसे पकड़ा था। विकास दूबे का केवल पॉलिटिक्स कनेक्शन ही नहीं था। वह गवाहों की भी हत्या कर देता था। इस घटना में उसके साथियों ने पुलिस से AK 47, इंसास और 2 पिस्तौल भी लूट लिया है। पुलिस की AK-47 से ही अपराधियों ने पुलिस वालों की हत्या की। विकास BSP के राजाराम पाल और पूर्व मंत्री अनन्त मिश्रा उर्फ "अंतू" मिश्रा का गुर्गा था।

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दुबे के खिलाफ करीब 60 आपराधिक मामले चल रहे
अधिकारियों ने बताया कि 2 और 3 जुलाई की मध्य रात्रि को चौबेपुर पुलिस थाने के अंतर्गत दिकरू गांव में पुलिस का दल आदतन अपराधी विकास दुबे को गिरफ्तार करने जा रहा था। उसी दौरान मुठभेड़ हो गई। दुबे के खिलाफ करीब 60 आपराधिक मामले चल रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस का एक दल अपराधी के ठिकाने के पास पहुंचने ही वाला था। उसी दौरान एक इमारत की छत से पुलिस दल पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई। जिसमें पुलिस उपाधीक्षक एस पी देवेंद्र मिश्रा, तीन उप निरीक्षक और चार कॉन्स्टेबल मारे गए। 
 

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उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एस सी अवस्थी ने बताया कि कुख्यात अपराधी को छापेमारी की संभवत: भनक लग गई थी। अवस्थी ने बताया कि दुबे और उसके साथियों ने अपने ठिकाने की ओर बढ़ रहे पुलिस कर्मियों को रोकने के लिए जेसीबी आदि लगा कर रास्ते को बाधित कर दिया था। पुलिस के दल को इसकी जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि रास्ता बाधित होने से पुलिस दल रुका और उसी दौरान अपराधियों ने एक इमारत की छत से अंधाधुंध गोलीबारी शुरु कर दी। घटना की सूचना पा कर अतिरिक्त महानिदेशक (कानून और व्यवस्था), महानिरीक्षक (कानपुर) और कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंच गए हैं। कानपुर की फॉरेंसिक टीम जाँच कर रही है। 


Tamanna Bhardwaj

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