पुलिस की बेरूखी! 20 दिन से बह रही लाश को डंडे से ढकेल कर रही सीमाक्षेत्र से बाहर

Sunday, January 7, 2018 12:55 PM

कानपुरः सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने यूपी पुलिस का संवेदनहीन चेहरा सामने ला दिया है। इस वीडियो में पुलिसकर्मी नहर में बहाए गए एक छात्र को डण्डे से कानपुर के ककवन थाने की सीमा से बाहर धकेलते दिखाई पड़ रहे हैं। बता दें कि इस छात्र की 20 दिन पहले मैनपुरी में हत्या करके हत्यारों ने लाश नहर में बहा दी थी। लाश 200 किलोमीटर बहकर कानपुर पहुंच गई थी। 


जानिए पूरा मामला 
जानकारी के मुताबिक किसी तमाशबीन द्वारा मोबाईल फोन से खींचे इस वीडियो में एक लाश नहर में फंसी दिखाई पड़ रही है। लाश को देखने के लिए भीड़ जुटी है। सूचना पाकर वहां पहुंचे कानपुर के थाना ककवन के कुछ पुलिसकर्मी भी इसमें दिखाई पड़ते हैं। ग्रामीणों को लगता है कि पुलिस लाश को बाहर निकालेगी और उसकी पहचान कराएगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता बल्कि एक पुलिसकर्मी डण्डे की मदद से लाश को धकेलकर आगे बहा देता है ताकि ये उसके थाने की सीमा से बाहर निकल जाए।
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यूनीफार्म से हुई छात्र की पहचान 
यह घटना बारह दिन पहले की है लेकिन सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद आला अधिकारी सक्रिय हुए। जिसके बाद मामले पर जांच बैठा दी गई। बारह दिन तक लाश पानी में बहती रही और कल इसे एक राहगीर ने पनकी इलाके में देखा। बारह दिनों तक छह थानों की सीमा से गुजर ये पनकी पहुंची तब तक लाश पूरी तरह सड़ चुकी थी। पनकी पुलिस ने लाश बाहर निकाली। यूनीफार्म और बेल्ट में लिखे स्कूल के नाम से पता चला कि ये मैनपुरी के अक्षरा स्कूल का छात्र है।
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16 दिसम्बर से है छात्र लापता 
मैनपुरी पुलिस से सम्पर्क साधा गया तो पता चला कि 16 दिसम्बर को 10वीं कक्षा का छात्र अशोक यादव घर से स्कूल जाने के लिए निकला था। उसके बाद छात्र लापता हो गया। अशोक के पिता रामवीर यादव ने उसका अपहरण करके हत्या किए जाने के शक में रिपोर्ट भी दर्ज कराई हुई है। 
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1 सिपाही और 2 होमगार्डो के खिलाफ कार्रवाई 
हालांकि इस बेजा हरकत के लिए एक सिपाही और 2 होमगार्डो के खिलाफ कार्रवाई की गई है, लेकिन क्या बीस दिन तक पानी में पड़े रहने के कारण हत्या के तमाम निशान मिट नहीं गए होगें। क्या इतने दिनों में मुजरिमों को बच निकलने का मौका नही मिल गया होंगा।
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पुलिस की लापरवाही का तीसरा मामला 
अपराध को समय पर सामने लाने में कानपुर पुलिस की विफलता का एक सप्ताह में ये तीसरा केस है। इसी सप्ताह एक वकील की उसके चेम्बर में और एक संवासिनी की राजकीय महिला शरणालय में हत्या कर दी गयी थी। पुलिस इसे बीमारी से होने वाली स्वभाविक मौत मानती रही जबकि दोनो मामलों में पोस्टमार्टम में मौत का कारण मर्डर निकला। अब इस तीसरे मामले मे तो पुलिस का और भी अधिक संवेदनहीन चेहरा सामने आया है।



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