चित्रकूट जेल गोलीकांडः वर्चस्व की लड़ाई में चली ताबड़तोड़ गोलियां और कुख्यातों के ब्लैक चैप्टर का हुआ The end

5/14/2021 6:00:47 PM

चित्रकूट:  उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला जेल में शुक्रवार को कैदियों के दो गुट आपस में भिड़ गए। वर्चस्व की इस भिड़ंत में दोनों तरफ से कई राउंड फायरिंग भी हुई जिसमें तीनों कुख्यातों की मौत हो गई है।दर्जनों राउंड गोलियां चलीं, जिसमें अंशु दीक्षित नामक बंदी ने फायरिंग कर मेराजुद्दीन और मुकीम उर्फ काला को मार डाला। मुकीम काला पश्चिम उत्तर प्रदेश का बड़ा बदमाश था। इसके बाद भारी पुलिस बल ने जेल के अंदर ही अंशु दीक्षित का एनकाउंटर कर दिया। वह भी पुलिस एनकांउटर में मारा गया।

बता दें कि यूपी में बागपत जिला जेल में माफिया मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद यह दूसरा बड़ा मामला है। हाल में सुल्तानपुर जेल से चित्रकूट जेल में शिफ्ट होने वाले पूर्वांचल के बड़े गैंगस्टर अंशु दीक्षित ने झड़प के बाद पश्चिमी यूपी के बड़े बदमाशों मुकीम काला और मेराजुद्दीन पर फायरिंग की। इस फायरिंग में चित्रकूट जेल में बंद मेराजुद्दीन और मुकीम काला की मौके पर ही मौत हो गई। जेल में फायरिंग की सूचना पर भारी पुलिस ने जेल को छावनी बना दिया और पुलिस पर फायरिंग करने के प्रयास में अंशु दीक्षित मुठभेड़ में मारा गया।

डीजी जेल के कार्यालय के अनुसार जिला जेल चित्रकूट की उच्च सुरक्षा बैरक में निरुद्ध अंशु दीक्षित पुत्र जगदीश जो जिला जेल सुल्तानपुर से प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित होकर चित्रकूट में निरूद्ध है ने आज सुबह लगभग दस बजे सहारनपुर से प्रशासनिक आधार पर आए बंदी मुकीम काला तथा बनारस जिला जेल से प्रशासनिक आधार पर आए मेराज अली को असलहे से मार दिया तथा पांच अन्य बंदियों को अपने कब्जे में कर लिया। इसके बाद जान से मारने की धमकी देने लगा। उसके पास असलहा था ऐसे में जिला प्रशासन को सूचना दी गई चित्रकूट के डीएम और एसपी ने पहुंचकर बंदी को नियंत्रित करने का बहुत प्रयास किया गया किंतु वह पांच अन्य बंदियों को भी मार देने की धमकी देता रहा।इसके बाद तो उसकी आक्रामकता तथा जिद को देखते हुए पुलिस ने कोई विकल्प ना देखते हुए फायरिंग की जिसमें अंशु दीक्षित भी मारा गया। चित्रकूट जिला जेल में इस प्रकार कुल तीन बंदी मारे गए हैं।

मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली 20 मार्च 2021 को जिला जेल बनारस से प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित करके चित्रकूट जेल लाया गया था। दूसरा मृत बंदी मुकीम काला सात मई 2021 को जिला जेल सहारनपुर से प्रशासनिक आधार पर  चित्रकूट जेल लाया गया था। अंशु दीक्षित ने शुक्रवार को जिस असलहे से पुलिस के साथ मुकीम काला व मेराज अली पर फायरिंग की थी, उसकी जिला कारागार में तलाशी कराई जा रही है।

आगे बता दें कि अंशु दीक्षित के साथ भिड़ंत में मारा गया मेराजुद्दीन बांदा जेल में बंद बसपा के विधायक बाहुबली मुख्तार अंसारी का करीबी था। बागपत जिला जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद मेराजुद्दीन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुख्तार का काम देखता था। इसमें मुकीम काला भी उसकी मदद करता था। मुकीम काला पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इनामी गैंगस्टर था। बागपत जिला जेल में सुनील राठी ने नाइन एमएम की पिस्टल से मुन्ना बजरंगी की हत्या की थी। मुन्ना बजरंगी भी पेशी पर उन दिनों बागपत गया था, जबकि सुनील राठी को उत्तराखंड की जेल से बागपत जेल में शिफ्ट किया था। राठी इन दिनों फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद है। 

बदमाशों का संक्षिप्त इतिहास- अंशु दीक्षित: पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी का खास व शार्प शूटर था। सीतापुर का रहने वाला था। उसने 27 अक्टूबर 2014 को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश एसटीएफ पर भी गोलियं चलाई थीं। इसके बाद दिसम्बर 2014 में इसे पकड़ा गया था।अंशु ने लखनऊ में कई साल पहले लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व महामंत्री विनोद त्रिपाठी की नेहरू एन्क्लेव में हत्या कर दी थी, उसके बाद लख़नऊ में तत्कालीन सीएमओ विनोद आर्या की हत्या में भी उसका नाम आया।

मेराज अली: मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली वाराणसी का रहने वाला था। पहले मुन्ना बजरंगी का खास था, फिर मुख्तार अंसारी से जुड़ा। इसकी अंशु दीक्षित से तनातनी रहती थी। संभव है उसी खुन्नस में अंशु ने इसे मारा हो। माफिया मुख्तार अंसारी का करीबी मेराज अहमद खान 21 मार्च को बनारस जेल से शिफ्ट किया गया था। मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी के सहयोगी  मेराज खान पर फर्जी तरीके से पिस्टल के लाइसेंस का नवीनीकरण कराने के आरोप में पांच सितंबर 2020 को जैतपुरा थाना प्रभारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ था। तीन अक्टूबर 2020 को आरोपित मेराज ने जैतपुरा थाना क्षेत्र के सरैया चौकी में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद से जिला कारागार बनारस में निरुद्ध था। मेराज अहमद को जिला कारागार  से चित्रकूट भेजा गया था। अशोक विहार कॉलोनी फेज-1 में भी उसका आवास है।

मुकीम काला: मुकीम काला पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दुर्दांत अपराधी व एसटीएफ के हाथों में मुठभेड़ में मारे जा चुके वसीम काला का भाई था। इसका गैंग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब व हरियाणा तक इसका वारदातें करता था। सहारनपुर में वर्ष 2015 में तनिष्क ज्वैलरी शोरूम में डकैती कांड को अंजाम दिया था। दोनों भाई पुलिस से नहीं डरते थे, यह तो एसटीएफ से सीधा मोर्चा खोल देते थे। उसके खिलाफ प. उप्र, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली में हत्या, लूट व डकैती जैसी गंभीर धाराओं के 61 मुकदमे दर्ज थे। वह और उसका गिरोह रंगदारी वसूलने और हत्या करने में माहिर था।पूर्व सांसद बाबू हुकुम सिंह काला की दहशत को कैराना पलायन के नाम से सामने लाए थे। इसके बाद ही उस पर खाकी का शिकंजा कसा गया।

 


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Content Writer

Moulshree Tripathi

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